सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया । दिल दीवाना हो गया मेरा, दिल दीवाना हो गया ॥ ---- (2)
एक तो तेरे नैन तिरछे, दूसरा काजल लगा । तीसरा नज़रें मिलाना, दिल दीवाना हो गया ॥ सांवली सूरत पे मोहन .....
एक तो तेरे होंठ पतले, दूसरा लाली लगी । तीसरा तेरा मुस्कुराना, दिल दीवाना हो गया ॥ सांवली सूरत पे मोहन ......
एक तो तेरे हाथ कोमल, दूसरा मेहँदी लगी । तीसरा मुरली बजाना, दिल दीवाना हो गया ॥ सांवली सूरत पे मोहन .....
एक तो तेरे पाँव नाज़ुक, दूसरा पायल बंधी । तीसरा घुंगरू बजाना, दिल दीवाना हो गया ॥ सांवली सूरत पे मोहन .....
@Bhajan Lekh
एक तो तेरे भोग छप्पन, दूसरा माखन धरा । तीसरा खिचडे का खाना, दिल दीवाना हो गया ॥ सांवली सूरत पे मोहन ......
एक तो तेरे साथ राधा दूसरा रुक्मण खड़ी । तीसरा मीरा का आना, दिल दीवाना हो गया ॥ सांवली सूरत पे मोहन ......
एक तो तुम देवता हो, दूसरा प्रियतम मेरे । तीसरा सपनों में आना, दिल दीवाना हो गया ॥
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया । दिल दीवाना हो गया मेरा, दिल दीवाना हो गया ॥