प्रसिद्ध कुमाऊंनी होली गीत :-
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी। जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
ठाड़ी भरूँ राजा राम जी देखे, ठाड़ी भरूँ राजा राम जी देखे। बैठी भरूँ भीजे चुनरी… जल कैसे भरू जमुना गहरी। बैठी भरूँ भीजे चुनरी…
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी, जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
धीरे चलूँ घर सास बुरी है, धीरे चलू घर सास बुरी है। धमकि चलूँ छलके गगरी…. जल कैसे भरूँ जमुना गहरी, धमकि चलूँ छलके गगरी….
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी। जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
गोदी पर बालक, सिर पर गागर, हे गोदी पर बालक, सिर पर गागर। पर्वत से उतरी गोरी… जल कैसे भरूँ जमुना गहरी, पर्वत से उतरी गोरी…
जल कैसे भरूँ जमुना गहरी जल कैसे भरूँ जमुना गहरी॥
Holi ki bahut shubkamnaye...