गई गई असुर तेरी नार मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा में गई.....
थाली भर-भर भोजन ले गई और गटुवन में नीर मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा में गई-गई ......
कौन राजा की बेटी कहियो, कौन राजा घर ब्याहि मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा गई गई .....
राजा जनक की बेटी कहियो, राजा दशस्थ घर ब्याहि मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा गई गई .....
कहा तुम्हारो नाम जो कहिये, कौन पुरूष की नारि मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा गई गई .....
सीता नाम हमारो कहिये, राम चन्द्र की नारि मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा गई गई .....
लो सीता यह भोजन करि लो, पियो गंगा जल नीर मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा गई गई .....
ना हम तुमरे भोजन करि है, ना पीवै जल नीर मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा गई गई .....
लो सीता यह चुनरी ओढ़ो, बनों लंकापति नार मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा गई-गई .....
ना हम तुमरी चुनरी ओढ़े, ना हम लंकापति नार मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा गई गई .....
जो तुम सिता सत्यवन्ती कहिये, हमरे राजा संग आई मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा गई गई .....
लंका हमरो मायका कहिये, मन्दोदरी मेरी माय मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा गई गई .....
जो हम सीता सत्यवन्ती कहिये, होवै रावण कुल नाश मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा गई-गई .....
गई गई रे असुर तेरी नार मन्दादरी सिया मिलन गई बागा में .....